सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-नेपाल संबधों ने एक नई दिशा और प्राप्त की है। दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबधों को सुदृढ़ करते हुए, मोदी सरकार ने नेपाल के साथ कूटनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को प्राथमिकता दी। अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्रा ने द्विपक्षीय संबधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया, जहां उन्होंने नेपाल की संसद को संबोधित करते हुए 1950 की शांति और मित्रता संधि की समीक्षा की इच्छा व्यक्त की। इसके पश्चात, दोनों देशों ने कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और सांस्कृतिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। रक्सौल-काठमांडू रेल परियोजना और जनकपुर-अयोध्या बस सेवा जैसी पहलें न केवल भौतिक संपर्क को बढ़ावा देती हैं, बल्कि जन-जन के बीच संबंधों को भी मजबूत करती हैं।

हालांकि, 2015 में नेपाल के नए संविधान की घोषणा के बाद उत्पन्न कुछ मतभेदों ने द्विपक्षीय संबंधों में चुनौतियाँ प्रस्तुत कीं। इन चुनौतियों के बावजूद, दोनों देशों ने संवाद और सहयोग के माध्यम से आपसी विश्वास को पुन: स्थापित करने के प्रयास किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्राओं ने सांस्कृतिक कूटनीति को भी प्रोत्साहित किया, जिसमें जानकी मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर और मुक्तिनाथ मंदिर की यात्राएँ शामिल हैं, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को और गहरा करती हैं।

सारांशत:, मोदी युग में भारत-नेपाल संबंधों ने सहयोग, संवाद और सांस्कृतिक निकटता के माध्यम से एक नई ऊंचाई प्राप्त की है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

सांकेतिक शब्द: भारत नेपाल कूटनीति, सीमा विवाद, आर्थिक सहयोग, सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी, भू-राजनीतिक प्रभाव

परिचय

नेपाल हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा खूबसूरत और पर्वतीय देश है। यह भारत और चीन के मध्य ”बफर स्टेट“ की तरह कार्य करती है। हिमालय क्षेत्र में यह देश पूर्व से पश्चिम तक लगभग 840 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण तक 240 किलोमीेटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके पश्चिम में काली नदी और पूर्व में सिंगलेला श्रेणी है, जो कि नेपाल और सिक्किम की सीमा बनाती है। उत्तर में हिमालय की चोटियां और दक्षिण में उष्ण-कटिबंधीय तराई के जंगलों द्वारा इसकी सीमा को निर्धारण किया जाता है। यह देश 26°20 उत्तरी अक्षांश से 30°10 उत्तरी अक्षांश तथा 70°15 पूर्वी देशान्तर से 88°15 पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। इस देश का उत्तर से दक्षिणी विस्तार 235 कि०मी० तथा पूर्व से पश्चिम तक का विस्तार 840 कि०मी० है। नेपाल का क्षेत्रफल 147181 वर्ग की०मी० है तथा जनसंख्या घनत्व 80 प्रतिर्वग कि०मी० है। नेपाल की आज की सीमांए उत्तर में तिब्बत (जो अब चीन का अंग बन गया है) की पर्वत श्रेणीयों चोओठ, अमोली, चोमोलु गमा (एवरेस्ट) तथा लोहोत्से-तू-मकालू द्वारा, पूर्व में सिक्किम एवं पश्चिमी बंगाल द्वारा, नेपाल की दक्षिणी सीमा बिहार और उत्तर प्रदेश से जबकि पश्चिम सीमा उत्राखंड से मिलती है। भौगोलिक दृष्टिकोण से आज भी नेपाल को तीन प्रमुख क्षेत्रों में बांटा जा सकता है।- पश्चिम क्षेत्र, मध्य क्षेत्र और पूर्वी क्षेत्र।01

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, नेपाल यात्रा

26 मई 2014 को अपने शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के बढते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एक राष्ट्रवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए सार्क देशों के राष्ट्र अध्यक्षों को आमंत्रित किया था। इसका उदेश्य क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती देना और पडोसी देशों के साथ भारत के संबधों को प्रगाढ़ बनाना था। यह कदम भारत की विदेश नीति में एक निर्णायक और रणनीतिक परिवर्तन का प्रतीक था, जिससे यह संकेत मिला कि भारत अपने क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंदर्र मोदी ने अपनी विदेश नीति की दिशा तय करते हुए श्शुरूआत में उन देशों की यात्रा की, जो भारत की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर थे। उन्होंने सबसे पहले उन देशों का दौरा किया जो रणनीतिक, अ र्थिक या सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के लिए महत्वपूर्ण थे। इससे यह संकेत मिला कि भारत अपनी विदेश नीति को उद्देश्यपूर्ण और प्राथमिकताओं पर केंद्रित बनाना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान की यात्रा के पश्चात नेपाल का दौरा किया, इस दौरान उन्हें नेपाली संविधान सभा को संबोधित करने वाले दूसरे विदेशी नेताओं में शामिल होने का सम्मान प्राप्त हुआ। सन 1990 मे जर्मनी के चांसलर हेल्मुट कोल ने नेपाल की संसद में भाषण देने का अवसर प्राप्त किया था। नेपाल को रियायती दर पर अमेरिकी डॉलर में सहायता देने की घोषणा करते हुए उन्होंने तीन से चार अगस्त 2014 को दो दिवसीय यात्रा में निम्न बिन्दुंओं पर ध्यान केंद्रित किया।

भारत सरकार द्वारा नेपाल में आये भूकम्प के दौरान चलाया गया राहत एवं बचाव अभियान

25 अप्रैल 2015 को नेपाल एक विनाशकारी भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुआ। यह भूकंप मोमेंट मैग्रिटयूड पैमाने पर 7.8 की तीव्रता का था, जिसका केंद्र राजधानी काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम मेें स्थित गोरखा जिले में था। इस विनाशकारी आपदा ने नेपाल में भारी तबाही और लोगों कीँ जान जाने का कारण बना, और इस त्रासदी से नेपाल के 39 जिले प्रभावित हुए। इस प्राकृतिक विपत्ति के कारण नेपाल में करीब 80 लाख घरों, स्कूलों, सरकारी भवनों और सांस्कृतिक धरोहरों को भारी नुकसान पहुँचा। नेपाल को चीन से पहले सहायता पहँुचाकर भारत ने मोदी सरकार की मजबूत और प्रभावी विदेश नीति को दर्शाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सक्रियता दिखाते हुए तुरंत निर्णय लिया और मात्र एक घंटे के भीतर मंत्रिमंडल की बैठक कर नेपाल को राहत भेजने का निर्देश दिया, जो उनके तत्पर और निर्णायक नेतृत्व का प्रमाण है। भारत की सेनाओं और सुरक्षा एजेंसियों ने भूकंप के बाद जो मानवीय सहायता अभियान चलाया उसे ’आॅपरेशन मैत्री‘ नाम दिया गया। भूकंप के महज चार घंटे के अंदर भारतीय वायुसेना का ब्-130 श्र-हरक्यूलिस विमान 39 राहत कर्मियों और साढ़े तीन टन राहत सामग्री के साथ काठमांडू पहँुचा राहत प्रयासों में प्स्.76ए ट.17ए ।छ.32ए और डप्.17ए जैसे विमानों की मदद ली गई। यह पूरा अभियान ’आॅपरेशन मैत्री‘ भारत-नेपाल के आपसी सबंधों को और मजबूती देने वाला साबित हुआ।03

प्रचंड का भारत दौरा: 2016 में भारत-नेपाल संबंधों की नई दिशा

नेपाल में नया संविधान लागू होने के बाद भी राजनीतिक स्थिरता बनी रही। माओवादी पार्टी के प्रमुख एवं नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने अपने प्रधानमंत्री पद के दूसरे कार्यकाल के दौरान 15-18 सितम्बर 2016 तक भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा की। वर्ष 2008 मे जब पुष्प कमल दहल पहली बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे, तब उन्होंने अपनी विदेश नीति में भारत के स्थान पर चीन को प्राथमिकता दी थी। किंतु अगस्त 2016 में दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होेंने अपनी पहली विदेशी यात्रा के लिए शरत को चुना। इस दौरे के दौरान उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों से विभिन्न द्विपक्षीय मुद्यों पर वार्ता की। नेपाल के प्रधानमंत्री ने अपनी भारत यात्रा के दौरान हिमाचल प्रदेश की नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना का निरीक्षण किया और हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ द्वारा आयोजित एक संयुक्त बैठक में भाग लिया। इसके साथ ही सितम्बर 2016 में भारत-नेपाल प्रधानमंत्रियों द्वारा एक साझा वक्तव्य भी जारी किया गया, जिसमें कई अहम मुद्दों को शामिल किया गया।

  1. भारत और नेपाल ने अपने मौजूदा द्विपक्षीय सम्बन्धों का गहराई से मूल्यांकन किया और यह निर्णय लिया कि दोनों देशों के बीच लाभकारी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इस उद्देश्य से, आपसी विचार-विमर्श की बैठक वर्ष 2016 मेें ही संपन्न की जाएगी।
  2. भारत और नेपाल ने दक्षिण एशिया में व्यापार, आवागमन और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर उपक्षेत्रीय सहयोग को विस्तारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे साथ ही दोनों ने सार्क और बिम्सटेक के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग के महत्व को भी उजागर किया।
  3. नेपाल ने 2015 के भूकंप के बाद भारत द्वारा दी गई मदद के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों देशों ने इस पर सहमति व्यक्त की कि भारत द्वारा घोषित राहत पैकेजों को तेजी से लागू किया जाए। भारत ने इस मौके पर यह घोषणा भी की कि वह नेपाल के 50,000 भूकंप प्रभावित लोगों को मिलने वाली सहायता राशि को बढाकर 2 लाख रूपये करेगा।
  4. नेपाल के प्रधानमंत्री ने यह जानकारी दी कि स्थापना के लिए देश में नया संविधान लागूं किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है कि समाज के सभी वर्गों को राजनीतिक प्रक्रिया में उचित भागीदारी मिल सके। हालॉकि भारतीय मूल का मधेसी अपने अधिकारों को लेकर संतुष्ट नहीं रहा और उसने लंबे समय तक असंतोष जताया। इस समुदाय ने अपने हितों की अनदेखी के विरोध में लगभग एक वर्ष तक आंदोलन किया। जिसके कारण भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में तनाव उव्पन्न हुआ।04

प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग

वर्ष 2017 में भारत और नेपाल के बीच राजनीतिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के साथ 23 से 27 अगस्त 2017 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे। यात्रा के दौरान भारत और नेपाल ने बाढ़ प्रबंधन के विषय पर विचार-विमर्श किया, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबधों में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। भारत और नेपाल ने बाढ़ से जुड़ी चुनौती का समाधान निकालने के लिए सप्तकोशी हाइड्रोपावर परियोजना में आ रही रूकावटो को समाप्त करने पर सहमति जताई। प्रत्येक वर्ष नेपाल की ओर से आने वाली बाढ़ से करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए भारत और नेपाल ने एक साझा उच्च स्तरीय समिति के गठन पर सहमति जताई। यात्रा के समय भारत और नेपाल के बीच मेची नदी पर पुल बनाने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसकी अनुमानित लागत 158.5 करोड़ रूपये है। एशियाई विकास बैंक द्वारा दिए गए ऋण से यह पुल निर्मित किया जाएगा, जो काकरविट्टा (नेपाल) से पानी टंकी बाई पास (भारत) तक फैले 1500 मीटर लंबे गलियारे के उन्नय का भाग है। इस परियोजना से सीमा क्षेत्र में संपर्क बेहतर होगा और द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी।

यह यात्रा इसलिए भी उल्लेखनीय रहीं क्योंकि इसमें दानों देशों के बीच राजनीतिक दृष्टिकोण में आए बदलाव पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को सशक्त करने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। नेपाल सहित सम्पूर्ण क्षेत्र में लोकतांत्रिक संस्थाओं का सशक्त होना शांति, विकास और खुशहाली की मूल शर्त मानी जाती हैै। डोकलाम संकट के बीच हुई प्रधानमंत्री देउबा की यह यात्रा न केवल सामयिक दृष्टि से अहम थी, बल्कि इसने 2015 के मधेसी आंदोलन के बाद प्रभावित हुए भारत-नेपाल रिश्तों को पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई।05

31 अगस्त 2018 को काठमांडू में प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ओली के बीच हुई बातचीत के बाद रक्सौल से काठमांडू तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेलवे लाइन के विकास के लिए आपसी सहमति बनी और इस संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह प्रस्तावित रेलवे लाइन बिहार के रक्सौल को नेपाल की राजधनी काठमांडू से जोडे़गी, और इसके निर्माण के लिए आवश्यक सर्वेक्षण का कार्य कोकण रेलवे को सौंपा गया है। इस रेल परियोजना के पूरा होने से भारत-नेपाल के आपसी संबंध और अधिक सशक्त होंगे तथा व्यापार का दायरा बढ़ेगा। इसके संचालन की शुरूआत के लिए वर्ष 2020 तय किया गया था।06

20 जनवरी 2020 को प्रधानमंत्री मोदी और ओली ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के माध्यम से संयुक्त रूप से जोगबनी-विराटनगर जांच चैकी का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच व्यापार और आवाजाही को अधिक सुविधाजनक और सुगम बनाना है। भारत और नेपाल सीमा पर संपर्क बढाने वाली परियोजनाओं पर मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि सड़क, रेल और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क का विकास संभव हो सके। भारत द्वारा सहायता प्राप्त इस जोगबनी-विराटनगर एकीकृत चेक पोस्ट का निर्माण भारत-नेपाल के बीच व्यापार और व्यवस्थित बनाने के लिए किया। यह चेक पोस्ट 260 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। करीब 140 कराड रूपये की लागत से निर्मित इस चेक पोस्ट में रोजाना 500 ट्रकों की आवाजाही को संभालने की क्षमता है, जिससे भारत और नेपाल के बीच लोगों का आपसी संपर्क और अधिक मजबूत होगा। नेपाल सीमा पर जोगबनी एकीकृत जांच चैकी दुसरी ऐसी सुविधा है, इससे पहले 2018 में रक्सौल-बीरगंज सीमा पर पहला एकीकृत चेक पोस्ट बनाया गया था। भारत ने गोरखा और नुकावोट जिलों में 5000 आवासों कं निर्माण के लिए सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया है।07

बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 मई 2022 को नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के निमंत्रण पर लुंबिनी की यात्रा की। यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल के लिए पाँचवीं और लुंबिनी की दिशा में उनकी पहली यात्री थी। प्रधानमंत्री मोदी का नेपाल में प्रधानमंत्री देउबा, उनकी पत्नी डॉ॰ आरजू राणा देउबा, गृह मंत्री श्री बाल कृष्ण खंड, विदेश मंत्री डॉ॰ नारायण खड़का, एंव अन्य मंत्रीमण्डलों ने भी उनका भव्य स्वागत किया। नेपाल आगमन के उपरांत प्रधानमंत्री मोदी ने मायादेवी मंदिर का भ्रमण किया, जहां भगवान बुद्ध का जन्म स्थल स्थित है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री देउबा ने मायादेवी मंदिर में बौद्ध धार्मिक रीति- रिवाजों के अनुसार सम्पन्न पूजा मे भाग लिया और श्रद्धापूर्वक प्रसाद अर्पित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने लुंबिनी में बनने वाले भारत के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सांस्कृतिक और धरोहर केंद्र की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बौद्ध केंद्र में बाद में एक मॉडल का उद्घाटन भी किया गया, जिसे शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली एक उन्नत सुविधा के रूप में तैयार किया गया है। इसमें पूजा-अर्चना के लिए कक्ष, ध्यान लगाने का स्थान पुस्तकालय, प्रदर्शनी कक्ष, खानपान की सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं होंगी, और यह विश्वभर से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं और सैलानियों के लिए सुलभ रहेगा। अपनी नेपाल यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने आपसी बैठक की, जिसमें सांस्कृतिक, आर्थिक, व्यापारिक, संपर्क, ऊर्जा और विकास सहयोग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए विशेष कदमों और सुझावों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री देउबा ने भारत की कंपनियों कां आमंत्रित किया कि वे पश्चिम सेती जल ऊर्जा परियोजना के निर्माण एवं विकास में भाग लें। प्रधानमंत्री मोदी ने आश्वासन दिया कि भारत नेपाल में जल ऊर्जा क्षेत्र को आगे बढ़ाने और इच्छुक भारतीय डेवलपर्स को नई परियोजनाओं की जल्द पहचान करने के लिए सहयोग प्रदान करेगा। दोनों राष्ट्रध्यक्षों ने भारत और नेपाल के लोगों के बीच आपसी समझ और संबंधों को मजबूत करने के लिए शि़क्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने पर अपनी सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी की लुंबिनी यात्रा ने भारत-नेपाल के मजबूत सांस्कृतिक संबंधो को प्रकट करने और उन्हें सशक्त बनाने में दोनों ओर की जनता के योगदान को भी विशेष महत्व दिया।08

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने 31 मई से जून 2023 तक भारत की एक आधिकारिक यात्रा की। प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ उनकी भारत यात्रा में मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्य, जैसे विदेश मंत्री और वित मंत्री भी सहभागी रहे। इस दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-नेपाल संबधों से जुडे़ राजनीतिक, आर्थिक, ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार और विकास जैसे तमाम क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक समीक्षा की। प्रधानमंत्री प्रचंड ने अपनी यात्रा के दौरान भारत की राष्ट्रपति द्रौपति मुर्मु, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। भारत यात्रा के दौरान प्रचंड ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ संयुक्त रूप से नीचे दिए गए बिंदुओं पर सहमति जताई।

भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और प्रभावी सहयोग की सराहना की, विशेष रूप से कोविड 19 महमारी के समय और उसके बाद मिले सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री प्रचंड ने उस नयी समझौता संधि का स्वागत किया जिसके तहत नेपाल अब भारत के आंतरिक जलमार्गों का उपयोग कर सकता है, जिससे नेपाल को व्यापार और परिवहन में नई सुविधा और रास्ते मिलेंगे।

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर संतोष जताया। उन्होंने इस बात की सराहना की कि नेपाल अब भारत को 452 मेगावाट तक बिजली का निर्यात कर रहा है, जिसमें दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी मजबूत हुई है। इसके साथ ही, नेपाल में बन रही 900 मेगावाट क्षमता वाली अरूण-3 जलविद्युत परियोजना में जो काम आगे बढा है। उसकी भी दोनों नेताओं ने प्रशंसा की और इसे द्विपक्षीय संबंधों में एक बडी उपलब्धि बताया।

दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक बिजली व्यापार के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया, जिसके तहत यह तय किया गया कि आने वाले दस वर्षां मे नेपाल से भारत को बिजली निर्यात की मात्रा को 10,000 मेगावाट तक बिजली निर्यात बढाने का प्रयास किया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी सभी उपाय अपनाने पर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी।09

13 फरवरी, 2023 को भारत और नेपाल के विदेश सचिवों के बीच बातचीत हुई। बातचीत में दोनों पक्षों ने आपसी आर्थिक एवं विकास साझेदारी को और सुदृढ करने पर जोर दिया। इस बैठक में भारत और नेपाल के बीच सहयोग बढाने व्यापार और आवागमन के साधनों, शिक्षा सांस्कृतिक आदान-प्रदान, स्वास्थ्य सेवाओं, देखभाल संपर्क सुविधा और आधारभूत संरचना जैसे अहम मुद्धों पर विचार-किया गया। नेपाल ने भारत से अनुरोध किया कि वह गौतम बुद्ध और पोखरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के सुचारू संचालन के लिए एक नया अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्ग उपलब्ध कराए। नेपाल ने जलवायु परिवर्तन से जुडे वैश्विक मुद्दों में दक्षिण एशियाई देशों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के उदेश्य से एक विशेष तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।10

निष्कर्ष

मोदी युग में भारत-नेपाल संबंधों की प्रस्तुति एक मिश्रित परिदृश्य प्रस्तुत करती है, जिसमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक साझेदारी के साथ-साथ कुछ चुनौतियाँ भी देखने को मिली हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को प्राथमिकता दी, जिससे नेपाल के साथ बुनियादी ढांचे, व्यापार, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला। दोनों देशों के बीच तीर्थयात्रा सर्किट, सड़क और रेलवे संपर्क तथा हाइड्रोपावर परियोजनाओं जैसे कई सकारात्मक कदम उठाए गए।

हालांकि, सीमा विवाद, नागरिकता कानूनों को लेकर मतभेद, नेपाल में बढ़ता चीनी प्रभाव और कुछ राजनीतिक निर्णयों के कारण संबंधों में तनाव भी देखने को मिला। नेपाल द्वारा नया राजनीतिक नक्शा जारी करना और भारत द्वारा अनौपचारिक आर्थिक प्रतिबंध जैसी घटनाएँ असहमति के प्रमुख बिंदु बने। इसके बावजूद, दोनों देशों के आपसी हित और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों ने द्विपक्षीय संवाद को बनाए रखा। भविष्य में, भारत-नेपाल संबंधों की स्थिरता के लिए आपसी विश्वास, संवाद और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी। भारत को नेपाल की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का सम्मान करते हुए, उसके विकास में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभानी होगी। इसी प्रकार, नेपाल को भी अपनी कूटनीतिक संतुलन नीति के तहत भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता देनी होगी। यदि दोनों देश आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील मुद्दों को सुलझाते हैं, तो यह संबंध केवल मजबूत होंगे और दक्षिण एशिया में स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देंगे।

सन्दर्भ ग्रंथ सूची

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  2. 2. प्रतियोगिता दर्पण 15 अक्टूबर 2024 समसामयिक घटना चक्र मासिक पत्रिका Vol.1 पृष्ठ संख्या 24
  3. 3. दृष्टि समसामयिक घटना चक्र (29 फरवरी 2016 अद्यतन) (2016) समसामयिक घटनाओं का वार्षिक संकलन, पृष्ठ संख्या 69.
  4. 4. वार्षिक रिर्पोट(2016-2017) विदेश मंत्रालय भारत सरकार पृष्ठ संख्या 39-40
  5. 5. अरिहंत समसामयिकी महासागर (वार्षिकी 2018) करंट अफेयर्स पृष्ठ संख्या 101,
  6. 6. अरिहंत समसामयिकी महासागर (नवम्बर 2018) मासिक पत्रिका पृष्ठ संख्या 33,
  7. 7. अरिहंत समसामयिकी महासागर (मार्च 2020) मासिक पत्रिका पृष्ठ संख्या 39-40,
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